dowry rate in bihar

जहाँ लड़का देख के तय होता है दहेज़ (Dowry) का रेट | Online Dowry rate in India

क्या होता है दहेज़ (Dowry)?

Indian subcontinent में दहेज़ (Dowry) एक ऐसी प्रथा है जिसने समाज में एक कुष्ठ रोग का रूप लिया हुआ है. दहेज (Dowry) का अर्थ है सम्पत्ति या धन अगर विवाह के समय वधू (लड़की वालों) के परिवार की तरफ़ से वर (लड़के वालों) को दी जाती है। उत्तर भारत के राज्यों में ये एक ऐसा अभिशाप है जिसके कारण लोग अपने घरों में बेटी पैदा होने से डरते हैं. भारत में दहेज़ प्रथा का लंबा इतिहास रहा है.

दहेज़ अपराध 

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक हमारे देश में औसतन हर एक घंटे में एक महिला दहेज संबंधी कारणों से मौत का शिकार होती है और वर्ष 2007 से 2011 के बीच इस प्रकार के मामलों में काफी वृद्धि देखने को मिली थी। बताते हैं कि विभिन्न राज्यों से वर्ष 2012 में दहेज हत्या के 8,233 मामले सामने आए। आंकड़ों का औसत बताता है कि प्रत्येक घंटे में एक महिला दहेज की बलि चढ़ रही होती है।

आप को हैरत होगी कि दहेज़ रूपी इस अभिशाप ने पूरे भारत वर्ष विशेष तौर पे उत्तर भारत (विशेष रूप से बिहार और उत्तर पूर्वी उत्तर प्रदेश) में एक विकराल रूप लिया हुआ है… जिसकी जीती जागती तस्वीर आप उत्तर प्रदेश व बिहार के दहेज़ लोभी आकड़ों से देख सकते हैं.

क्या है दहेज़ का रेट (Dowry rate)?

दैनिक भाष्कर ने बिहार में दहेज के रेट जानने के लिए पड़ताल की थी। इसके लिए उनकी टीम ने कई लोगों से संपर्क किया था। इनमें वैसे लोग भी शामिल थें जिन्होंने हाल ही में अपनी बेटी की शादी की या दुल्हे की तलाश में थें। उनसे बातचीत के दौरान दहेज के रेट की एक भयानक तस्वीर सामने आई।

जाति के हिसाब से आईएएस/आईपीएस दूल्हों के रेट में अंतर आ सकता है। जैसे ब्राह्मण-राजपूत जाति के दूल्हों के लिए 60 लाख रुपयों की बोली लगाई जाती है तो भूमिहार या कुर्मी जाति के आईएएस/आइपीएस दूल्हे के रेट 80 लाख से डेढ़ करोड़ रुपए तक पहुंच जाते हैं। महंगाई के साथ ही दहेज का रेट भी बढ़ रहा है। पिछले साल की तुलना में करीब 25 फीसदी का उछाल आया है। उत्तर भारत में दहेज में लड़की पक्ष से भारी-भरकम राशि की मांग की जाती है। लड़का अगर IAS या IPS है तो दहेज की डिमांड 60 लाख से एक करोड़ रुपए तक हो सकती है।

दहेज़ (Dowry) को ऑनलाइनीकरण

ऑनलाइनीकरण का मतलब बस ऐसे समझिये कि जब भी आप ऑनलाइन कोई प्रोडक्ट खरीदते हैं तो आप को आप्शन दिया जाता है कि किस रेंज में और कैसा प्रोडक्ट लेना है, बस वैसे ही दहेज़ का ये खेल ऑनलाइन शुरू हुआ जिसमें आप अपनी बोली लगा सकते हैं और अपने किसी की बोली लगवा सकते हैं.

समाज इतना बेशर्म हो चूका है कि दहेज़ को भी एक ऑनलाइन बिज़नस बना चूका है… ये एक ऐसा शांत व्यापार बन चूका है कि आप भी ऊँगली दांतों में दबा लेंगे…. हाल ही में एक ऐसी वेबसाइट का पता लगा जो अविवाहितों को उनके दहेज का रेट बताती रही थी, इस वेबसाइट पर कुछ जाति और समुदाय के अविवाहितों को उनकी योग्यता, व्यवसाय, प्रोफेशन और आय को आधार बनाकर उसके दहेज की गणना कर बताई जा रही थी। इस वेबसाइट का नाम था Dowry rate calculator…. जिसका स्क्रीन शॉट निचे है

Dowry calculator

ये वेबसाइट आईएएस अफसर की दहेज कीमत 65 लाख रुपए बता रही थी, तो वहीं पिता के परिवारिक व्यवसाय वाले बेरोजगार का दहेज रेट 15 लाख रुपए बताती थी। इस वेबसाइट का खुलासा भाजपा के सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया (तब कांग्रेस के शीर्ष नेता) ने केंद्रीय महिला और बाल विकास मंत्रालय व प्रधानमंत्री कार्यालय को शिकायत करते हुए किया था। साइट में आईएएस से लेकर बेरोजगार तक 13 कैटेगिरी में बांटा गया था. अगर किसी की सैलरी 20000 से ज्‍यादा या कम है तो उसे 15 लाख तक का दहेज मिलने की कैटगरी में बताया गया था.


ऐसी और इसी जैसी कई वेबसाइट तब सरकार के राडार पे आई थी, जो दहेज़ का रेट कैलकुलेट कर के अपने उपभोक्ताओं को बताती थी. इस वेबसाइट से ये बात सामने आई कि बिहार में दहेज़ के क्या रेट हैं और ये कैसे फिक्स किया जाता है.

क्या आप जानते हैं बिहार में दहेज़ (Dowry) का रेट?

आप कभी नौकरी के लिए अप्लाई किये हैं, किये होंगे तो आपको पता है की अप्लाई करने से पहले आपको फॉर्म भरना पड़ता है. फॉर्म में आप को अपनी क्वालिफिकेशन, जाति, धर्म, क्षेत्र एवं भाषा के बारे में बताना पड़ता है. बस ऐसे ही आप को दहेज़ लेने के लिए करना पड़ता है.  बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में दहेज़ का रेट है, और ये रेट जाति के आधार पे है, जाति में भी लड़के की क्वालिफिकेशन को देख के रेट फिक्स किया जाता है.

  1. ब्राह्मण-राजपूत-कायस्थ-वैश्य

लड़का अगर सरकारी नौकरी में है तो

  • आईएएस-60 लाख से एक करोड़ कैश, महंगी गाड़ी और फ्लैट, (कैश बढ़ भी सकता है)
  • आईपीएस और अलॉयड सर्विस-50 से 75 लाख कैश, 25 लाख का सामान, जेवर।
  • क्लास वन अफसर (जैसे बैंक पीओ)-20 से 30 लाख कैश, फोर व्हीलर।
  • क्लास टू अफसर-10 से 15 लाख कैश, फोर व्हीलर।
  • क्लास थ्री अफसर (जैसे क्लर्क)- 7 से 10 लाख कैश, हैसियत के हिसाब से कार या बाइक।
  • क्लास 4 सर्विस- 3 से 5 लाख कैश, बाइक।

 

लड़का अगर प्राइवेट नौकरी में है तो

  • Class (A): 7 से 10 लाख कैश, फोर व्हीलर.
  • Class (B): 5 लाख कैश, फोर व्हीलर।
  • Class (C): 3 लाख कैश, 50 हजार की गाड़ी।
  • Class (D):  तीन लाख तक कैश।

           2. भूमिहार-कुर्मी-कुशवाहा-यादव

लड़का सरकारी नौकरी में है तो:

  • आईएएस-80 लाख से डेढ़ करोड़ कैश, महंगी गाड़ी और फ्लैट। (वर के बैकग्राउंड के हिसाब से कैश 5 करोड़ तक जा सकता है।)
  • आईपीएस और अलॉयड सर्विस-75 लाख से 1 करोड़ कैश, 25 लाख का सामान, जेवर।
  • Class (1): (बैंक पीओ)-20 से 30 लाख कैश, फोर व्हीलर।
  • Class (2): 10-15 लाख कैश, फोर व्हीलर।
  • Class (3): (क्लर्क) 7 से 10 लाख कैश, हैसियत के हिसाब से कार या बाइक।
  • Class (4): सर्विस-3 से 5 लाख कैश, बाइक।

 

लड़का अगर प्राइवेट नौकरी में है तो

  • Class (1): 7 से 10 लाख कैश, फोर व्हीलर।
  • Class (2): 5 लाख कैश, फोर व्हीलर।
  • Class (3): 3 लाख कैश, 50 हजार की गाड़ी।
  • Class (4):  तीन लाख तक कैश।

Note 1: भूमिहार और कुर्मी जाति में अगर लड़के के हिस्से अगर 2 से 4 बीघा जमीन है तो सिपाही या नियोजित शिक्षक को 10 से 12 लाख रुपए तक दहेज में कैश।

Note 2: यादव जाति में भी कमोबेश दहेज का यही रेट है, जमीन और अपना मकान हो तो कैश में बढ़ोतरी संभव है।


दहेज़ System का प्रभाव:

वैसे तो दहेज़ का विरोध होता भी आया है, मगर सोच अभी भी लूटने वाली ही है. दहेज़ का प्रभाव प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से हर जगह पड़ता है. प्रत्यक्ष रूप से पड़े प्रभाव तो आपको पता ही होगा, आज हम बात करते हैं अप्रत्यक्ष रूप के प्रभाव की, थोडा सा दिमाग लगाना पडेगा .… चलिए आपको पहले ही बता देते हैं की दहेज़ सिस्टम का अप्रत्यक्ष रूप से पड़ा प्रभाव है भ्रष्टाचार. जी हाँ आश्चर्य में मत पड़िए, ये एक कडवी सच्चाई है.

भ्रष्टाचार की उत्पत्ति ही दहेज़ से

आप हैरत कर सकते हैं कि दहेज़ से भ्रष्टाचार का क्या लेना देना .. तो आपको बताता चलूँ कि दहेज़ एक ऐसी प्रथा है जिसके जड़ से ही भ्रष्टाचार की शुरुआत हो जाती है.

एक उदाहरण से आप समझ सकते हैं…

मान लीजिये कोई सरकारी कर्मचारी है, जिसकी तनख्वाह अधिकतम 30 हज़ार है प्रति माह, जिसके हिसाब से उसके पूरे जीवन में लगभग 30 साल की तनख्वाह 10800000 (एक करोड़ आठ लाख) होगी. अगर उस कर्मचारी के पास खुद का घर हो तो मोटा मोटा मान लीजिये उसने अपने पूरे जीवन की तनख्वाह से आधा पैसा बचा लिया, तब भी उसके पास बचे पैसे होंगे लगभग 54 लाख.

याद रखिये उस कर्मचारी की दो बेटियां हैं,…जिनको शिक्षित करना और पाल पोस के बड़ा करना, जिनके शादी का खर्च ही 60 लाख होगा अगर वो अच्छे घर के लड़के (मतलब इंजीनियर, डॉक्टर या किसी अधिकारी) से शादी करता हैं.

दहेज़ का रेट देख लीजिये ऊपर….

अब आप बताइए कि उपरोक्त रेट के हिसाब से वो कर्मचारी अपने दोनों बेटी की शादी कर सकता है… ?

मेरा जवाब होगा कि कभी नहीं, और अगर ऐसी शादी करेगा भी तो याद रखिये वो कर्मचारी उस विभाग में कहीं न कहीं रिश्वत ले रहा होगा और आप उसका शिकार हो रहे होंगे. और आप जब रिश्वत देंगे तो ज़ाहिर सी बात है कि आप भी रिश्वत लेंगे क्योंकि आपके घर भी तो दो बेटियां हैं.

 

उपरोक्त दहेज़ रेट कथित वेबसाइट द्वारा की गई गणना के आधार पे है, जोकि जनसत्ता से लिया गया था. केंद्रीय और राज्य सरकार के तुरंत कार्रवाई के बाद इस वेबसाइट और जैसी लगभग सभी वेबसाइट को बंद कर दिया गया. लेकिन सवाल ये है कि सरकार द्वारा बनाए गए कानून और जागरूकता के बावजूद भी ये कुरीति क्यों है?

एक सभ्य समाज के लिए ऐसी कुरीतियाँ शोभा नहीं देती हैं, इसे ख़त्म करने की आवश्यकता है अब……..दहेज़ प्रथा के विरोध में आइये, एक स्वस्थ व सुरक्षित समाज बनाइये ….

 

फोटो प्रतीकात्मक है, फोटो स्रोत: (AliXeeshanTheatorStudio)


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